आज मनमोहन सिंह जी ने अपना भाषण हिंदी में दिया इसके लिए उनको हार्दिक धन्यावाद, क्योंकि राष्ट्र भाषा का सम्मान देश का सम्मान है.
डा. मनमोहन सिंह
प्रधान मंत्री, भारत सरकार
प्रधान मंत्री, भारत सरकार
प्रधान मंत्री जी ने आज अपने भाषण में कहा कि उन्होंने अपने बचपन के दस वर्ष मुश्किल हालात में बिताए. उस समय उनके गाँव में मूलभुत सुविधाएं नहीं थी, उन्होनें रात के अँधेरे को मिट्टी के तेल के दिये की रोशनी से चीरते हुए अपनी शुरूआती पढ़ाई पुरी की.
अपनी इस मेनहत से वो एक बडे अर्थशास्त्री बने और आजकल कहा भी जा रहा है:
अपनी इस मेनहत से वो एक बडे अर्थशास्त्री बने और आजकल कहा भी जा रहा है:
Singh is King
धन्य है भारत देश जहाँ के लोग विपरीत परिस्थितियों में भी अपनी प्रतिभा को निखार कर देश का नाम विश्व स्तर पर रोशन करते हैं।
मेरा प्रश्न: मनमोहन सिंह जी आप अपनी कडी मेनहत से एक बडे अर्थशास्त्री और भारत देश के प्रधान मंत्री तो बन गए, लेकिन इस बीच आप अपनी राष्ट्र भाषा हिंदी को भुल गए और अँग्रजी से ज्यादा लगाव कर बैठे. ऐसा क्युँ हुआ? क्या हिंदी भाषा देश या व्यक्ति की प्रगति में बाधक है?
